Geographer: नदी-घाटी परियोजना आदि कार्य करने की जिम्मेदारी
भूगोल को पृथ्वी का विज्ञान कहा जाता है। इसके अंतर्गत धरती एवं उसके आसपास पाए जाने वाले तत्वों का अध्ययन किया जाता है। सही मायने में देखा जाए तो ज्योग्राफर की भूमिका एक साइंटिस्ट की भांति होती है। पृथ्वी की संरचना तथा उसके अंदर होने वाली हलचलों, नदी-घाटी परियोजना आदि कार्य करने की जिम्मेदारी भी ज्योग्राफर की होती है। एक ज्योग्राफर को कई विभागों से तालमेल बिठाकर काम करना होता है। भूगोल एक प्रैक्टिकल विषय है। यह कक्षा में बैठ कर सीखने वाला विषय नहीं है। व्यावहारिक रूप से फील्ड में जाकर इसको जानना सरल है। यात्रा करते हुए अनेक भौगोलिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
वेशभूषा और मकानों की बनावट
यात्रा के दौरान धरातल के बदलते लक्षणों, वनस्पति, फसलों, लोगों की वेशभूषा और मकानों की बनावट आदि को ध्यान से देखकर भौगोलिक ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है। किसी बड़े नगर का स्टेशन आने से पहले ही खेतों में फसलें बदल जाती हैं। अनाज के खेतों का स्थान सब्जी के खेत ले लेते हैं। पर्वतीय यात्रा के समय सीढ़ीदार खेत तथा उनमें उगी विशिष्ट फसलें और ऊंचाई के साथ वृक्षों की बदलती हुई जातियां भूगोल की कई बातें अनायास ही बता जाती हैं। समुद्र के तट पर खेलते बच्चे और समुद्र में नाव खेत मछुआरे भूगोल की कितनी ही जानकारियां देते हैं। इसलिए भूगोल को भ्रमण का विषय कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

प्रगतिशील विज्ञान
भूगोल को एक प्रगतिशील विज्ञान माना जाता है। इसकी विषयवस्तु में निरंतर बदलाव हो रहा है। अपनी विषयवस्तु को समृद्ध बनाने के लिए भूगोल अन्य विज्ञानों से विषयवस्तु ग्रहण करता है। भूगोल का एक अलग दृष्टिकोण है। इसी कारण अन्य विज्ञानों से ली गई विषयवस्तु को आत्मसात कर के भी वह अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यही नहीं, भूगोल अपनी विषय वस्तु की समृद्धि के लिए भौतिक विज्ञानों और सामाजिक विज्ञानों पर आश्रित है।
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पीएचडी लेवल तक के कोर्स
इसमें बैचलर से लेकर पीएचडी लेवल तक के कोर्स मौजूद हैं। छात्र बारहवीं के बाद अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बीए, बीएससी में दाखिला बारहवीं के बाद और एमएससी में दाखिला स्नातक के बाद मिलता है। इसके बाद पीएचडी की राह आसान हो जाती है। पीजी डिप्लोमा भी स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें कई सर्टिफिकेट कोर्स भी हैं, जिन्हें स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें रेगुलर व पत्रचार दोनों तरह के कोर्स मौजूद हैं।
कई शाखाएं
भूगोल की भी कई शाखाएं, फिजिकल ज्योग्राफी, ह्यूमन ज्योग्राफी, एंवायरनमेंटल ज्योग्राफी होती हैं। फिजिकल ज्योग्राफी में जहां पृथ्वी, नदी, खाली स्थानों, जलवायु आदि का अध्ययन किया जाता है, वहीं ह्यूमन ज्योग्राफी में मानव सहित राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। इसी तरह एंवायरनमेंटल ज्योग्राफी में प्रोफेशनल्स पर्यावरण और उसका मानव जीवन पर प्रभाव, मौसम और जलवायु आदि का गहनता से अध्ययन करते हैं।


